सोच रही हूँ आज अकेले बैठे बैठे कि आखिर अपने आपको कितने अकेलेपन में डाल दिया है खुद की मर्जी से।
अच्छानक यूँ ही मेरी आख मेरे श्री क्रिष्ण की मूर्ति पर चली गई और मैं सोचती रही कि वो तो एक प्रेमी है और फिर बन गए एक राजा, एक राजकुमार, एक यूवराज ।
क्या उनमें वक्त में वापस जाने की जिग्यासा थी जैसे हम में होती है? क्या उन्हें भी वो आशा थी कि एक दिन सारे बंधन टूप जाएंगे, मैं फिर वापस जाऊंगा, फिर बसुरी के स्वर बजेंगे। क्या उनमें वो जिग्यासा थी।
Did he suffer from the temptation of the past too? Is he anxious to meet his loved ones, once the one he dearly loved?