Image of the Hindi poem Meri Maa, a touching tribute to motherhood

मेरी माँ (Meri Maa)

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माँ, मेरी माँ

जब तक मा मेरे साथ थी, मुझे लगता था हमेशा ही रोकती है, टोकती है, हर बाद पर कुछ औरी बाद निकाल लेती है, आखिर कब तक?

अब जब मा नहीं है, लगता है, मेरा तो माईका ही सूना पड़ गया है।

बहुत सुन्दर, बहुत अभिमानी थी मेरी माँ, छोटी छोटी बातों को लेकर बैट जाती थी, मुझे हमेशा कहती थी, पानी पियो, तुम बहुत कम पानी पीती हो, मुझे लगता है तुम्हें सायंस लेना चीज़ा पता है, रात को टाइम पे क्यों नहीं सोती?

यह सब कहते कहते, कितने साल नज़ाने ऐसे ही बीद गया है, आज कितने बरस हो गये हैं,किसीने यह सब मुझे कहा ही नहीं, पूछा ही नहीं कि मैं कैसी हूँ,

मेरी बाते अनकही सी रह गई, माँ जब तक तुम थी, मैं तुमसे थी, मैं तुम्हें समझ ही नहीं पाई माँ, मेरी माँ


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